बुधवार, नवंबर 23, 2011

मैं लफ्ज दर लफ्ज खोखला होता गया

          पढ़िए नजरिया पर प्रकाशित मेरी अगज़ल 

                                     * * * * * 

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सार्थक लिंक दिया है आपने!

ZEAL ने कहा…

Thanks for the link. Loved the ghazal.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

acche sher kahe hain ...

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