शनिवार, अक्तूबर 22, 2011

आई दीवाली

                         
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                           * * * * *

9 टिप्‍पणियां:

preet ने कहा…

इतना खूबसूरत ब्लॉग मैं तो देखती ही रह गई.बहुत-बहुत बधाई.

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Achha kiya aapne .

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर

educationlovers ने कहा…

.बहुत-बहुत बधाई.

educationlovers ने कहा…

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आज है 22 अक्टूबर का दिन आज का दिन है बड़ा महान, आज के दिन लाखो फूल खिले .

जिनसे महंक रहा मेरा देश महान......
आज हमारे जिन सम्माननीय दोस्तों एवं उनके दोस्तों का जन्मदिन है ,
उन सभी को हमारी एवं "अखिल भारतीय छात्र कल्याण परिषद्" की तरफ से हार्दिक शुभ कामनाएं एवं बधाई

दोस्तों आप अपने मूल्य को समझो ...
अपने ऊपर विश्वास करो ..........
तुम संसार के महत्वपूरण व्यक्ति हो ...........

भगवान परमपिता परमात्मा आप सभी को निरोग रक्खे , आपको शक्ति एवं लम्बी आयू प्रदान करे ताकि आप अपने बुजुर्गों का सम्मान करते हुए परिवार , समाज और देश की और अधिक सेवा कर सकें !!

न देख मुड़ कर तुझे मंजिल को पाना है, अपनी हस्ती को आफताब बनाना है !
न मचलना राहों मैं चाँद को देखकर, तुम्हें सूरज बनकर आसमां पे जगमगाना है !!
वो खुद ही तय करते हैं मंजिल आसमानों की, परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की !
रखते हैं जो आसमान छूने का होंसला, उनको नहीं होती परवाह गिर जाने की !

शुभाकांक्षी
नरेश कुमार शर्मा "नरेश "

educationlovers ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
educationlovers ने कहा…

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आज है 22 अक्टूबर का दिन आज का दिन है बड़ा महान, आज के दिन लाखो फूल खिले .

जिनसे महंक रहा मेरा देश महान......
आज हमारे जिन सम्माननीय दोस्तों एवं उनके दोस्तों का जन्मदिन है ,
उन सभी को हमारी एवं "अखिल भारतीय छात्र कल्याण परिषद्" की तरफ से हार्दिक शुभ कामनाएं एवं बधाई

दोस्तों आप अपने मूल्य को समझो ...
अपने ऊपर विश्वास करो ..........
तुम संसार के महत्वपूरण व्यक्ति हो ...........

भगवान परमपिता परमात्मा आप सभी को निरोग रक्खे , आपको शक्ति एवं लम्बी आयू प्रदान करे ताकि आप अपने बुजुर्गों का सम्मान करते हुए परिवार , समाज और देश की और अधिक सेवा कर सकें !!

न देख मुड़ कर तुझे मंजिल को पाना है, अपनी हस्ती को आफताब बनाना है !
न मचलना राहों मैं चाँद को देखकर, तुम्हें सूरज बनकर आसमां पे जगमगाना है !!
वो खुद ही तय करते हैं मंजिल आसमानों की, परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की !
रखते हैं जो आसमान छूने का होंसला, उनको नहीं होती परवाह गिर जाने की !

शुभाकांक्षी
नरेश कुमार शर्मा "नरेश "

educationlovers ने कहा…

हम तो पसंद है जलती आग हथेली पर ले कर चलने वाले .......

यु तो सोना आग में ताप कर ही , कुन्द्दन हुआ करता है !
जो सजता है शुराही सी गर्दन में , और ताज की शोभा भी बढ़ता है .....
हम कुन्द्दन तो ना बन सकेंगे , हम सोना नहीं हम तो तपाने वाले !
आग से डरते नहीं कभी , हम सोना तपाने,कुन्द्दन बनाने वाले........
यूँ तो शिलाखंडों मे छुपे , लावे नहीं दिखा करते है !
पर जो होते है , भूगर्भ वैज्ञानिक हम जैसे वो देख लिया करते है ........
सबने शिलाखंडो को , सिर्फ़ पिघलते देखा होगा !
पर हमने तो देखा है उन्हें मचलते हुए ..........
और भी देखना चाहता हूँ , पहले भी कई देखे हैं धधकते हुए ..........
पहले भी शांत किये है शिलाखंड धधकते हुए , और भी शांत करना चाहता हूँ ...
ऐसे ही एक शांत शिलाखंड पर अपना अपना दिन गुजारा करता हूँ !
पहले भी शांत किये है शिलाखंड धधकते हुए , और भी शांत करना चाहता हूँ ...
दिन तो बहूत गुजार लिए , अब शुकून से शाम गुजारना चाहता हूँ ............
अब शुकून से शाम गुजारना चाहता हूँ .. अब शुकून से शाम गुजारना चाहता हूँ

नरेश कुमार शर्मा "नरेश "
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educationlovers ने कहा…

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आज है 23 अक्टूबर का दिन आज का दिन है बड़ा महान, आज के दिन लाखो फूल खिले .

जिनसे महंक रहा मेरा देश महान......
आज हमारे जिन सम्माननीय दोस्तों एवं उनके दोस्तों का जन्मदिन है ,
उन सभी को हमारी एवं "अखिल भारतीय छात्र कल्याण परिषद्" की तरफ से हार्दिक शुभ कामनाएं एवं बधाई

दोस्तों आप अपने मूल्य को समझो ...
अपने ऊपर विश्वास करो ..........
तुम संसार के महत्वपूरण व्यक्ति हो ...........

भगवान परमपिता परमात्मा आप सभी को निरोग रक्खे , आपको शक्ति एवं लम्बी आयू प्रदान करे ताकि आप अपने बुजुर्गों का सम्मान करते हुए परिवार , समाज और देश की और अधिक सेवा कर सकें !!

न देख मुड़ कर तुझे मंजिल को पाना है, अपनी हस्ती को आफताब बनाना है !
न मचलना राहों मैं चाँद को देखकर, तुम्हें सूरज बनकर आसमां पे जगमगाना है !!
वो खुद ही तय करते हैं मंजिल आसमानों की, परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की !
रखते हैं जो आसमान छूने का होंसला, उनको नहीं होती परवाह गिर जाने की !

शुभाकांक्षी
नरेश कुमार शर्मा "नरेश "

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