सोमवार, जनवरी 02, 2012

उतर जाए सफीने से

4 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

दस दिनों तक नेट से बाहर रहा! केवल साइबर कैफे में जाकर मेल चेक किये और एक-दो पुरानी रचनाओं को पोस्ट कर दिया। लेकिन आज से मैं पूरी तरह से अपने काम पर लौट आया हूँ!
नववर्ष की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी होगी!

Rajesh Kumari ने कहा…

dono ghazal bahut hi khoobsurat hain.nav varsh ki shubhkamnayen.

kanu..... ने कहा…

wah.wese aapki ye original post bhi padhi hai..aur yaha aakar bhi accha laga

'साहिल' ने कहा…

वाह ! बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल

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